सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

शख्सियत :दुष्यंत चौटाला

शख्सियत :दुष्यंत चौटाला

चौधरी देवीलाल जी दो विशेष गुणों के लिए जाने जाते थे। एक लोकलाज और दूसरा उदारता। यह नहीं के आक्रोश में नहीं आते थे। आक्रोश को ज़ाहिर करते थे लेकिन जल्दी ही उसे भूल भी जाते थे। जिसे  आवेश में आकर थप्पड़ रसीद कर देते थे प्यार  भी उसे ही करते थे। अंदर बाहर दोनों तरफ से एक पारदर्शिता झांकती रिसती रहती थी उनकी शख्सियत से।
सहज रूप में उनके खानदानी गुण आगे बढ़के मार्गदर्शन करने  की क्षमता दुष्यंत चौटाला में चली आई है।दुष्यंत अपनी सौम्यता और अदबियत  में आगे रहते हैं। एक सहज चुंबकीय आकर्षण इस युवा की ओर एक बेहद का खिंचाव  पैदा करता है। मुद्दा पर्यावरण का हो या राजनीति आपकी एक बेबाक राय है। राज्य की सीमाओं का अतिक्रमण करते हुए आप एक अखिल भारतीय दृष्टिकोण अपने विमर्श में प्रस्तुत करते हैं।आपका जन्म तीन अप्रैल उन्नीस सौ अठासी को हरयाणा के हिसार जिले के दरौली गाँव (तहसील आदमपुर )में हुआ।
राजनीति में आपका आगाज़ जिस शानदार तरीके से हुआ है वह आपको नै बुलंदियों पर ले जाएगा। आप को सोलहवीं लोकसभा के सबसे युवा सांसद रहे हैं। तब आपकी उम्र  छब्बिस  बरस ही थी।
आपकी आरम्भिक शिक्षा हिसार के  सेंट्  मैरि तथा हिमाचल प्रदेश के लारेंस स्कूल ,सनावर में हुई। कैलिफोर्निआ स्टेट यूनिवर्सिटी से आपने बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन एन्ड मैनेजमेंट में ग्रेजुएशन किया। उच्च शिक्षा का जहां तक सवाल है , आपने नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी से लॉ की डिग्री एल.एल.बी तथा गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी आफ साइंस एन्ड टेक्नालाजी  से जनसंचार में पोस्टग्रेडुएशन किया।
आपकी पत्नी मेघना जी उनकी चहेती ही नहीं बकौल मेघना जी आप घर और बाहर में एक संतुलन बनाये रखकर उनका भी दिल जीत लेते हैं।परिवार को आप पूरा समय देते है। यही तो प्रबंधन है टाइम मैनजमेंट है। किसी की भी अनदेखी नहीं। 
आपकी कदकाठी ठवन अपने परदादा जैसा ही है अंदाज भी वही है। आप परम्परा और आधुनिकता गाँव और शहर का मिश्र एक साथ प्रस्तुत करते हैं। लोकसभा में आपका लेंड अक़्विज़िशन बिल (भूमि अधिग्रहण विधयेक )पर प्रखर वक्तव्य  सुनने से ताल्लुक रखता है। रायसीना गाँव के रायसीना हिल और तब के वाइसराय का बंगला बनने का दर्द उन  के इस विषय पर विमर्श में मुखरित हुआ है। बकौल आपके जब किसान जागता है तब वह सरकार के खिलाफ प्रदर्शन नहीं करता है नियमकायदे नहीं सरकार की  पीठ तोड़ने की कूवत रखता है। गाँव के लिए किसानी के लिए आप एक उम्मीद बन के खड़े हुए हैं। पूरा होम वर्क करने के बाद आप संसद में आते हैं और पूरे सत्र में आपकी मौज़ोदगी संसद को एक नै आवाज़ एक नै परवाज़ देती प्रतीत होती  है।
आप हरियाणा राज्य की मौजूदा शासन व्यवस्था का एक बुनियादी खम्भा बन गए हैं। भविष्य के लिए यह राजनीतिक प्रबंध एक टिकाऊ राजनीति का आधार बन सकता है। भगवान् आपको इसी तरह रचनात्मक ऊर्जा और प्रबंध कौशल से भरे रहे।एक राष्ट्रीय युवा के किरदार में   आप धूमकेतु की तरह छा गए हैं।भारतीय राजनीति के लिए यह एक शुभ संकेत है।आपकी मातुश्री नैना जी भी आपकी जननायक जनता पार्टी से जीत कर आई हैं। पहले ही प्रयास में आप की पार्टी अपनी इन्फेंसी में ही दस विधयाकों को  जितवा  लाई है।पूत के पैर  पालने में ही दीख जाते हैं।देवीलाल जी ने सहज ही प्रधानमन्त्री बन ने से इंकार कर दिया था। वे अपनी सीमाओं में रहे संभावनाओं में नहीं। दुष्यंत भी ऐसा ही करें यह ज़रूरी नहीं।     
 
खेलों में भी आपकी दिलचस्पी बनी हुई है आप अखिल भारतीय टेबिल टेनिस संघ के अध्यक्ष रहे आये हैं । अलावा इसके आप 'इंडियन कौंसिल आफ रिसर्च सोसायटी एन्ड फ्लोर' के सदस्य भी हैं।भारत का  किसान आपकी तरफदारी में आगे बढ़ेगा इसमें संदेह करने की गुंजाइश नहीं है।
जयश्रीकृष्ण जयश्री राम जयहिंद  सेना प्रणाम।  
 
  
   

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

विद्या विनय सम्पन्ने ब्राह्मणे गवि हस्तिनी | शुनि चैव श्वपाके च पंडिता : समदर्शिन :||

 विद्या विनय सम्पन्ने  ब्राह्मणे गवि हस्तिनी |  शुनि चैव  श्वपाके च पंडिता :  समदर्शिन :||  ज्ञानी महापुरुष विद्याविनययुक्त ब्राह्मण में और चांडाल तथा गाय , हाथी एवं कुत्ते में भी समरूप परमात्मा को देखने वाले होते हैं।  व्याख्या : बेसमझ लोगों द्वारा यह श्लोक प्राय :  सम व्यवहार के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। परन्तु श्लोक में 'समवर्तिन  :' न कहकर 'समदर्शिन  :' कहा गया है जिसका अर्थ है -समदृष्टि न कि सम -व्यवहार। यदि स्थूल दृष्टि से भी देखें तो ब्राह्मण ,हाथी ,गाय और कुत्ते के प्रति समव्यवहार असंभव है। इनमें विषमता अनिवार्य है। जैसे पूजन तो विद्या -विनय युक्त ब्राह्मण का ही हो सकता है ,न कि चाण्डाल का ; दूध गाय का ही पीया जाता है न कि कुतिया का ,सवारी हाथी पर ही की  जा सकती है न कि कुत्ते पर।  जैसे शरीर के प्रत्येक अंग के व्यव्हार में विषमता अनिवार्य है ,पर सुख दुःख में समता होती है,अर्थात शरीर के किसी भी अंग का सुख  हमारा सुख होता है और दुःख हमारा दुःख। हमें किसी भी अंग की पीड़ा सह्य नहीं होती। ऐसे...

तोको पीव मिलैंगे घूँघट के पट खोल रे

यहां भी पधारें : Videos 2:41 Ghoonghat Ke Pat Khol Re Tohe - Jogan 1950 - Geeta Dutt YouTube  ·  Suhanee Lall 2 minutes, 41 seconds 14-Jul-2012 (१ ) Videos 28:34 कबीर : घूँघट के पट खोल YouTube  ·  CEC 28 minutes, 34 seconds 24-Aug-2020 (१ )https://www.youtube.com/watch?v=ar5lHsWN3Fg तुमको  प्रीतम  मिलेंगे,  अपने  घूँघट  के  पट  खोल  दे।  हर  शरीर  में  वही  एक  मालिक  आबाद  है।  किसी  के  लिए  कड़वा  बोल  क्यों  बोलता  है।  धन  और  यौवन  पर  अभिमान  मत  कर  क्योंकि  यह  पाँच  रंग  का  चोला  झूठा  है।  शून्य  के  महल  में  चिराग़  जला  और  उम्मीद  का  दामन  हाथ  से  मत  छोड़।  अपने  योग  के  जतन  से  तुझे  रंगमहल  में  अनमोल  प्रीतम  मिलेगा।  कबीर...

लेकिन आदमी की आँख भी गज़ब कर देती है। पति की तो और भी ज्यादा देख लेती है। यही है पैरानोइया पैरानॉयड बिहेवियर सोशल शिज़ोफ्रेनिया।

कृपया यहां भी पधारें : (१) Lajwanti - Wikipedia (२) Lajwanti (1958) - Lajwanti (1958) - User Reviews - IMDb इस जमाने को प्रेम अच्छा लगता है  ना प्रेमी। स्त्री -पुरुष संबंधों की अपनी ही भाव छवि बनाये बैठा है ज़माना।इसी  बनी  बनाई मन गढंत  छवि का शिकार बनती हैं " लाजवंती  "की नायिका कविता (अदाकारा नरगिश ). पति एक नामीगिरामी एडवोकेट हैं वकालत में पूरी तरह गुम। पत्नी टुकुर टुकुर उनकी बाट जोहा करती है। विशेष और आम दिनों में भी कोई निश्चय नहीं रहता उनके आने का।  इसी दरमियान यूरोप से उनके मित्र लौटते हैं एक बेहद ज़िंदादिल इंसान सच्चे सीधे दोस्त हैं सुनील ज़माना उनके और कविता के किरदार का अफ़साना बना देता है। बस उनका कुसूर इतना है वह अपनी भाभी साहिबा का पोर्ट्रेटिएट(एक व्यक्ति चित्र )बनाकर अपने दोस्त निर्मल की आने वाली विवाह की सालगिरह पर  सौंपना चाहता है ताकि उसे निर्मल के  वैयक्तिक चित्र के साथ सज्जित किया जा सके। इसी आशय को मूर्त रूप देने के लिए सुनील के घर कविता के सब्जिक्ट के बतौर बैठकें होने  लगती हैं। कविता की अपनी भाभी ही  शक़ के बीज को उर्वर...