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जबकि अनेक रूपा नारी कहीं सुदर्शना है तो कहीं नाभि -दर्शना परिधान की तरह आकर्षक।कहीं मुग्धा कहीं प्रगल्भा ,कहीं शमिता तो कहीं वनिता। कहीं सद्यस्नाता सौंदर्य तो कहीं वह विज्ञापन में वैसे ही आकर्षक है जैसे डिन्नर टेबिल पर करीने से सज्जित सलाद प्लेट । कहीं दुर्गा है तो कहीं रणचणडी ,कहीं अबला कहीं सबला। और कहीं सिर्फ बला.

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जबकि अनेक  रूपा नारी कहीं सुदर्शना है तो कहीं नाभि -दर्शना परिधान की तरह आकर्षक।कहीं मुग्धा कहीं प्रगल्भा ,कहीं शमिता तो कहीं वनिता। कहीं सद्यस्नाता सौंदर्य तो  कहीं वह विज्ञापन में वैसे ही आकर्षक है जैसे डिन्नर टेबिल पर  करीने  से सज्जित सलाद प्लेट । कहीं दुर्गा है तो कहीं रणचणडी ,कहीं अबला कहीं सबला। और कहीं सिर्फ बला.


 अस्थि चर्म मय देह यह, ता सों ऐसी प्रीति !
नेकु जो होती राम से, तो काहे भव-भीत ?

खीझकर रत्नावली ने तुलसीदास को यही शब्द सुनाये थे। यह दोहा सुनते ही तुलसीदास पत्नी को वहीं छोड अपने गाँव राजापुर लौट गये।कहते हैं कथा वाचक तुलसी की रत्नावली से बेहद की प्रीती थी जब उनका भाई उन्हें तुलसी की अनुपस्तिथि में अपने गाँव ले गया तो पत्नी  वियोग में बेकल तुलसी कहते हैं उफनती बाढ़ में बहती लाश का टेका लिए रत्नावली के पास पहुँच गए। भीषण बरसात की रात में सांप को रस्सी समझ तुलसी उसी के सहारे दूसरी मंज़िल पे सोई पत्नी के कक्ष में खिडकी से कूद गए। कह सकते हैं तुलसी पहले पत्नी पीड़ित हैं। 
पहला पत्नी नंदन कौन हैं यह पता लगाना शोध का विषय है। 

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