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ये ही किसान नाम के आंदोलन को अफवाह का टेका लगाने वाले शहज़ादे हैं

 अब जबकि मिया खलीफा ,ग्रेटा थुन बर्ग ,और राहुल सोच की रिया के ट्विटिंग रेट्स सामने आ चुके हैं देश जानना चाहता है राहुल गाँधी जो काफी समय से चीं चीं चें चें करते रहें हैं कृपया बतलाये एक ट्ववीट पोस्ट करने का कितना मेहनताना मिलता है (रणदीप )सुरजेवाला जिनका एक भी पुर्जा नहीं है अपना बतलायें उन्हें रिया के ट्ववीट को री -ट्ववीट करने का कितना पैसा मिला। दोस्तों इन्हें अपने अपने ज़ेहन में बिठा लो अब जबकि मिया खलीफा ,ग्रेटा थुन बर्ग ,और राहुल सोच की रिया के ट्विटिंग रेट्स सामने आ चुके हैं देश जानना चाहता है राहुल गाँधी जो काफी समय से चीं चीं चें चें करते रहें हैं कृपया बतलाये एक ट्ववीट पोस्ट करने का कितना मेहनताना मिलता है (रणदीप )सुरजेवाला जिनका एक भी पुर्जा नहीं है अपना बतलायें उन्हें रिया के ट्ववीट को री -ट्ववीट करने का कितना पैसा मिला। दोस्तों इन्हें अपने अपने ज़ेहन में बिठा लो ये ही किसान नाम के आंदोलन को अफवाह का टेका लगाने वाले शहज़ादे हैं जिन्हें अनगिन लोगों को रोज़गार देश के विकास को गति प्रदान करने वाले नायाब उद्यमी  बंधू पसंद नहीं हैं दो नाम इनके हीमोग्लोबिन में मिल चुकें हैं राहुल गांधी सपने में भी अडानी अम्बानी  बड़बड़ाते हैं। जिन्हें अनगिन लोगों को रोज़गार देश के विकास को गति प्रदान करने वाले नायाब उद्यमी  बंधू पसंद नहीं हैं दो नाम इनके हीमोग्लोबिन में मिल चुकें हैं राहुल गांधी सपने में भी अडानी अम्बानी  बड़बड़ाते हैं। 

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 विद्या विनय सम्पन्ने  ब्राह्मणे गवि हस्तिनी |  शुनि चैव  श्वपाके च पंडिता :  समदर्शिन :||  ज्ञानी महापुरुष विद्याविनययुक्त ब्राह्मण में और चांडाल तथा गाय , हाथी एवं कुत्ते में भी समरूप परमात्मा को देखने वाले होते हैं।  व्याख्या : बेसमझ लोगों द्वारा यह श्लोक प्राय :  सम व्यवहार के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। परन्तु श्लोक में 'समवर्तिन  :' न कहकर 'समदर्शिन  :' कहा गया है जिसका अर्थ है -समदृष्टि न कि सम -व्यवहार। यदि स्थूल दृष्टि से भी देखें तो ब्राह्मण ,हाथी ,गाय और कुत्ते के प्रति समव्यवहार असंभव है। इनमें विषमता अनिवार्य है। जैसे पूजन तो विद्या -विनय युक्त ब्राह्मण का ही हो सकता है ,न कि चाण्डाल का ; दूध गाय का ही पीया जाता है न कि कुतिया का ,सवारी हाथी पर ही की  जा सकती है न कि कुत्ते पर।  जैसे शरीर के प्रत्येक अंग के व्यव्हार में विषमता अनिवार्य है ,पर सुख दुःख में समता होती है,अर्थात शरीर के किसी भी अंग का सुख  हमारा सुख होता है और दुःख हमारा दुःख। हमें किसी भी अंग की पीड़ा सह्य नहीं होती। ऐसे...

तोको पीव मिलैंगे घूँघट के पट खोल रे

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लेकिन आदमी की आँख भी गज़ब कर देती है। पति की तो और भी ज्यादा देख लेती है। यही है पैरानोइया पैरानॉयड बिहेवियर सोशल शिज़ोफ्रेनिया।

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