सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

खबरदार रहना है ज़ेहन में रखना है इस गैंग को जिन्होनें (भोले )-भाले -बरछी किसान वेषधारियों को आगे किया हुआ है पंजाब पश्चिमी बंगाल और उत्तरप्रदेश सदनों के चुनाव में लीड लेने की नीयत से

राहुल गांधी और स्वीडन की पर्यावरण एक्टिविस्ट ग्रेटा थुन बर्ग  में क्या अंतर है जबकि दोनों एक ही काम कर रहे हैं दोनों की भौगोलिक स्थिति में भले अंतर हो लेकिन एक ही टूल किट के अनुगामी हैं ये दोनों शातिर जो पराली जलाकर दिल्ली और आसपास की हवा को गंधाते रहे हैं उन किसान वेषधारियों को भड़का रहे हैं। हमारा मानना है राहुल इस टूल किट से पहले से वाकिफ थे ,वे इसमें उल्लेखित भारत के दो नामवर घरानों के खिलाफ विषवमन करते रहें हैं उसी का नतीजा था पंजाब में मोबाइल टावरों की खुली तबाही जिसकी अगुवाई वहां के मुखिया करते रहें हैं। भारत धर्मी समाज के मेरे हमवतनों प्रात : स्मरणीय है इन शातिरों से आवाम को आगाह करते रहना। इनमें सभी बावन गज के हैं। चाहे वह अब तक दिल्ली के प्रदूषण को हवा पानी मिट्टी को संदूषित करने के पीछे उत्तर प्रदेश (पश्चिमी ),हरयाणा और पंजाब के किसानों की पराली जलाने की आदत का हाथ देखने वाले केजरीवाल (गिरगिटिया स्वामी असत्यानन्द केजर -बवाल )रहें हों या टुकड़ा- टुकड़ा गैंग के सरगना। दिल्ली की सीमाओं को ऐशगाहों में तब्दील करने वाले भगवानों के पास निरंतर यही गैंग लगातार पहुँच रहा है। भारत तेरे टुकड़े होंगें की रट लगाने वालों के आलमी लिंकों का अब साफ़ साफ़ खुलासा हो चुका है। इनमें सबसे शातिर हैं अपने आपको सीता -राम कहलवाने वाले सैट-रम-खेचड़ी और एक पाकिस्तानी पत्रकारा से डिजिटल प्रेम रस सेवी शशि थरूर साहब जो अब भाड़े की  बिकाऊ आलमी गायिकाओं ,पोर्न सिताराओ और ग्रेटा -थुन - बर्ग की हिमायत में खुलकर आ गए हैं। ये इनका एक और डिजिटल प्रेम है। खबरदार रहना है ज़ेहन में रखना है इस गैंग को जिन्होनें (भोले )-भाले -बरछी किसान वेषधारियों को आगे किया हुआ है पंजाब पश्चिमी बंगाल और उत्तरप्रदेश सदनों के चुनाव में लीड लेने की नीयत से। वहीँ इनकी खबर लेनी है याद रहे। जय भारत जय भारत धर्मी समाज।    

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

विद्या विनय सम्पन्ने ब्राह्मणे गवि हस्तिनी | शुनि चैव श्वपाके च पंडिता : समदर्शिन :||

 विद्या विनय सम्पन्ने  ब्राह्मणे गवि हस्तिनी |  शुनि चैव  श्वपाके च पंडिता :  समदर्शिन :||  ज्ञानी महापुरुष विद्याविनययुक्त ब्राह्मण में और चांडाल तथा गाय , हाथी एवं कुत्ते में भी समरूप परमात्मा को देखने वाले होते हैं।  व्याख्या : बेसमझ लोगों द्वारा यह श्लोक प्राय :  सम व्यवहार के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। परन्तु श्लोक में 'समवर्तिन  :' न कहकर 'समदर्शिन  :' कहा गया है जिसका अर्थ है -समदृष्टि न कि सम -व्यवहार। यदि स्थूल दृष्टि से भी देखें तो ब्राह्मण ,हाथी ,गाय और कुत्ते के प्रति समव्यवहार असंभव है। इनमें विषमता अनिवार्य है। जैसे पूजन तो विद्या -विनय युक्त ब्राह्मण का ही हो सकता है ,न कि चाण्डाल का ; दूध गाय का ही पीया जाता है न कि कुतिया का ,सवारी हाथी पर ही की  जा सकती है न कि कुत्ते पर।  जैसे शरीर के प्रत्येक अंग के व्यव्हार में विषमता अनिवार्य है ,पर सुख दुःख में समता होती है,अर्थात शरीर के किसी भी अंग का सुख  हमारा सुख होता है और दुःख हमारा दुःख। हमें किसी भी अंग की पीड़ा सह्य नहीं होती। ऐसे...

तोको पीव मिलैंगे घूँघट के पट खोल रे

यहां भी पधारें : Videos 2:41 Ghoonghat Ke Pat Khol Re Tohe - Jogan 1950 - Geeta Dutt YouTube  ·  Suhanee Lall 2 minutes, 41 seconds 14-Jul-2012 (१ ) Videos 28:34 कबीर : घूँघट के पट खोल YouTube  ·  CEC 28 minutes, 34 seconds 24-Aug-2020 (१ )https://www.youtube.com/watch?v=ar5lHsWN3Fg तुमको  प्रीतम  मिलेंगे,  अपने  घूँघट  के  पट  खोल  दे।  हर  शरीर  में  वही  एक  मालिक  आबाद  है।  किसी  के  लिए  कड़वा  बोल  क्यों  बोलता  है।  धन  और  यौवन  पर  अभिमान  मत  कर  क्योंकि  यह  पाँच  रंग  का  चोला  झूठा  है।  शून्य  के  महल  में  चिराग़  जला  और  उम्मीद  का  दामन  हाथ  से  मत  छोड़।  अपने  योग  के  जतन  से  तुझे  रंगमहल  में  अनमोल  प्रीतम  मिलेगा।  कबीर...

लेकिन आदमी की आँख भी गज़ब कर देती है। पति की तो और भी ज्यादा देख लेती है। यही है पैरानोइया पैरानॉयड बिहेवियर सोशल शिज़ोफ्रेनिया।

कृपया यहां भी पधारें : (१) Lajwanti - Wikipedia (२) Lajwanti (1958) - Lajwanti (1958) - User Reviews - IMDb इस जमाने को प्रेम अच्छा लगता है  ना प्रेमी। स्त्री -पुरुष संबंधों की अपनी ही भाव छवि बनाये बैठा है ज़माना।इसी  बनी  बनाई मन गढंत  छवि का शिकार बनती हैं " लाजवंती  "की नायिका कविता (अदाकारा नरगिश ). पति एक नामीगिरामी एडवोकेट हैं वकालत में पूरी तरह गुम। पत्नी टुकुर टुकुर उनकी बाट जोहा करती है। विशेष और आम दिनों में भी कोई निश्चय नहीं रहता उनके आने का।  इसी दरमियान यूरोप से उनके मित्र लौटते हैं एक बेहद ज़िंदादिल इंसान सच्चे सीधे दोस्त हैं सुनील ज़माना उनके और कविता के किरदार का अफ़साना बना देता है। बस उनका कुसूर इतना है वह अपनी भाभी साहिबा का पोर्ट्रेटिएट(एक व्यक्ति चित्र )बनाकर अपने दोस्त निर्मल की आने वाली विवाह की सालगिरह पर  सौंपना चाहता है ताकि उसे निर्मल के  वैयक्तिक चित्र के साथ सज्जित किया जा सके। इसी आशय को मूर्त रूप देने के लिए सुनील के घर कविता के सब्जिक्ट के बतौर बैठकें होने  लगती हैं। कविता की अपनी भाभी ही  शक़ के बीज को उर्वर...