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सीएए के खिलाफ साज़िश (२६ अक्टूबर अंक )सम्पादकीय मोहनभागवद जी के मार्फ़त सही आगाह करता है पुन : चेताता है सोये हुए मुस्लिम समाज को के चंद बौद्धिक भकुए मार्क्सवाद के बौद्धिक गुलाम परिंदे आज भी 'पर तौले हुए हैं :

सीएए के खिलाफ साज़िश (२६ अक्टूबर अंक )सम्पादकीय मोहनभागवद जी के मार्फ़त सही आगाह करता है पुन : चेताता है सोये हुए मुस्लिम समाज को के चंद बौद्धिक भकुए मार्क्सवाद के बौद्धिक गुलाम परिंदे आज भी 'पर तौले हुए हैं : परिंदे अब भी पर तौले हुए हैं , हवा में सनसनी घोले हुए हैं।  गज़ब है सच को सच नहीं कहते वो , कुरान-ओ-उपनिषद खोले हुए है. माननीय सुप्रीम कोर्ट धन्यवाद का पात्र है उसने अपना बड़प्पन कायम रखते हुए  शाहीनबाग के पटकथा नायकों को आम आदमी के अधिकार पे कुल्हारा चलाने के लिए उसे कष्ट में डाले रखने के लिए फटकारा है .आज यही आलम रक्तबीज कांग्रेसियों ,उद्धव ठीकरों , पवारों ने कृषि सम्बन्धी विधेयकों के क़ानून  बनने पर किसानों को बरगलाने का खड़ा किया हुआ है।ऐसा ही भरम मुस्लिम भाइयों के नागरिकता छीन लिए जाने का शाहीन बागों की मार्फ़त फैलाया था जिसमें पॉपुलर फ्रंट आफ इंडिआ भी शरीक था।'आप ' के कई विधायक भी।   फ़ारुख अब्दुल्लाओं , महबूबाओं को हवा देने गुपकारी , चीन और पाक के तरफ़दार यही विपक्षी भांड और भौं...

अन्नदाता का जागना ही इस देश से दलिद्दर दूर करेगा

दैनिक जागरण (२२ सितंबर २०२० अंक )का दूसरा सम्पादकीय "समझने लगे किसान "उतना ही सार्थक संदेशपरक है जितना पहला सम्पादकीय "संसदीय अराजकता ".हम दूसरे सम्पादकीय की बात तक ही खुद को सीमित रखेंगे। बड़ा सुखद अनुभव है भिवानी जिले की तहसील कस्बा लोहारू में ट्रेक्टरों पर आरूढ़ किसानों का कृषि संबंधी तीन विधेयकों के समर्थन में उतरना।  ज़ाहिर है किसान जागरूक है धंधेबाज़ हुड्डाओं -चौटालाओं की करामात के प्रति एक अदद मूढ़मति शहज़ादा कांग्रेस के अनर्गल प्रलाप के प्रति। प्रबुद्ध किसान जानता है और मानता है :आज उसके दोनों हाथों में लड्डू हैं। वह समझ गया  है -अब वह अपने फसल  उत्पाद देश भर में कहीं भी बेचने के लिए स्वतन्त्र है। स्थानीय मंडियों में अपना अनाज लाये या पड़ौसी जिले ,राज्य की मंडियों में ले जाए।  एक  उत्पादक संघ के तहत अपना माल (कृषि जिंस ) बेचे या किसी व्यवसाई से अनुबंध के तहत।  अनुबंध खेती के तमाम प्रावधान (किसान हितों का संरक्षण करने वाले हैं )यह भी उसने जान लिया है।ई -रजिस्ट्री इसका खुलासा करती है। किसान को अधिक धन देकर कोई भी खिलाड़ी व्यावसायिक धंधेबाज़ किसान को बंधुआ...

खुद को रातों रात मशहूर किया है मैं ने , आज अपने से बड़े शख्स को ंगाली दी है।

सुरक्षा पर सस्ती राजनीति (प्रथम संपादकीय दैनिक जागरण ,१६ सितंबर २०२० )भारत धर्मी समाज के चिंतन मनन का दर्पण हैं वृहत्तर भारत धर्मी समाज इसी विध प्रति-क्रिया  करता है देश की अखंडता सम्प्रभुता के मुद्दे पर। जहां तक राहुल गांधी साहब के बचकाने वक्तव्यों का सवाल है वह ऐसे प्रलापों का उनके शब्दों में कटाक्षों का आशय न समझते हों ऐसा नहीं है दरसल अब नेहरुअवशेषी कांग्रेस के पास न तो कुछ खोने को है न देने को। राहुलजी खुद ज़मानत पर हैं। प्रतिरक्षा मंत्री की संसद में दो टूक बयानी स्थिति की गंभीरता को रौशनी में लाती है। वह देश जिसके बगल में दो दो शत्रु हो एक बड़ा दूसरा उसका बगलबच्चा वह ऐसी बचकानी हरकत नहीं कर सकता जैसा राहुल जी करते आये हैं इन दिनों। खुद को रातों रात मशहूर किया है मैं ने ,  आज अपने से बड़े शख्स को ंगाली दी है। देश तो सेना के साथ खड़ा है आखिर प्रधानमन्त्री चीन के खिलाफ कब खड़े होंगे -जिस लड़के को पायजामे का इज़ारबंद भी बाँधने का  सुऊर न हो वह कुछ भी कह सकता है। नेहरुवियन कांग्रेस ने जो देश की अखंडता के खिलाफ विष बोया था वह अब फल देने लगा है। राहुल उसी का आस्वाद हैं। ...

क्या हम अधजले मुर्दे ,पूजा का सामान यूं ही नदियों के वक्षस्थल पर उड़ेलते रहेंगे ?

ताकि यमुना मैली न हो (पानी की पवित्रता १५ सितंबर अंक  )इसके लिए जनता जनार्दन सभी का सहयोग ज़रूरी है।  हमें अपने जलस्रोतों की खुद ही हिफाज़त करनी होगी। ज़रूरी नहीं है हमारे यहां भी शिकागो की तरह शिकागो नदी के जलमल से संदूषित होने जलापूर्ति में इस जल के शामिल होने से  प्लेग फैले उसके बाद शहर और नियोजक चेते ,ढाई सौ साल पहले वहां यही हुआ था आज शिकागो नदी और हिमनद से बनीं झील का पानी पारदर्शी है नीले जल में नीला आसमान स्काईलाइन दर्शनीय है शिकागो की। (मुझे दो मर्तबा यह मौक़ा मिल चुका है )वहां की जलमल निकासी व्यवस्था को खंगालने का। दिल्ली आगरा गुरुग्राम को यमुना ,आगरा तथा गुरुग्राम नहरों को स्वच्छ रखना है ,तो शहरी जलमल का जलस्रोतों में छोड़ना (विसर्जन )मुल्तवी रखना होगा। इसका विकल्प खोजा जाना ही चाहिए। प्रदूषण कानूनों का उल्लंघन दंडनीय अपराध और रुपया दो लाख का जुर्माना मुक़र्रर किया जाए। डंडे से चलता है - देश कोई भी हो। अमरीका में अन-यूज़्ड मैटीराल भी किराए पे ली जगह पे छोड़ना दंडनीय है वहां दंड का मतलब दंड है। ...

नज़्म :अभी तो मैं जवान हूं :(हफ़ीज़ जालंधरी; गायक :मल्लिका पुखराज

नज़्म :अभी तो मैं जवान हूं                            (हफ़ीज़ जालंधरी)                               गायक :मल्लिका पुखराज अभी तो मैं जवान हूं, अभी तो मैं जवान हूं । हवा भी ख़ुशगवार है, गुलों पे भी निखार है, तरन्नुमें हज़ार हैं, बहार पुर बहार है। कहाँ चला है साक़िया, इधर तो लौट, इधर तो आ, अरे ये देखता है क्या,  उठा सुबू, सुबू उठा,        (सुबू – सुराही) सुबू उठा, पयाला भर,  पयाला भरके दे इधर, चमन की सिम्त कर नज़र,  समाँ तो देख, बेख़बर।          ( सिम्त – तरफ़) वो काली काली बदलियाँ,  उफ़क़ पे हो गईं अयाँ,           (उफ़क़ – क्षितिज, अयाँ – दिखीं ) वो इक हजूमे मैक़शाँ,  है सू ए मैक़दां रवाँ,                                ...

सुखी रहो निंदक जग माहीं, रोग न हो तन सारा। हमरी निंदा करने वाला, उतरै भवनिधि प्यारा। निंदक के चरनों की अस्तुति, भाखौं बारंबारा। चरनदास कह सुनियो साधो, निंदक साधक भारा।

संत चरणदास वि.सं. 1760 की भाद्रपद शुक्ल तृतीया, मंगलवार को मेवात के अंतर्गत डेहरा नामक स्थान में संत चरणदास का जन्म हुआ था। इनका पूर्व नाम रणजीत था। पांच-सात वर्ष की अवस्था में ही इन्हें कुछ आध्यात्मिक ज्ञान हो गया था। इनके गुरु का नाम शुकदेव था। संत चरणदास ने गुरु से दीक्षित होकर कुछ दिनों तक तीर्थाटन किया और बहुत दिनों तक ब्रजमंडल में रहकर श्रीमद्भागवत का अध्ययन किया। इनके अंतिम 50 वर्ष अपने मत के प्रचार में ही बीते। इन्होंने  सं. 1839 की अगहन सुदी 4 को दिल्ली में अपना देह त्याग किया। संत चरणदास को ग्रंथ रचना का अच्छा अभ्यास था। इनके द्वारा रचित 21 ग्रंथों का पता चलता है। ये ग्रंथ मुंबई और लखनउ से प्रकाशित हो चुके हैं। इनके मुख्य 12 ग्रंथों के प्रधान विषय योग साधना, भक्तियोग एवं ब्रह्म ज्ञान है। ये नैतिक शुद्धता के पूर्ण पक्षधर है और चित्त शुद्धि, प्रेम, श्रद्धा एवं सद्व्यवहार को उसका आधार मानते हैं। इनकी रचनाओें में इनकी स्वानुभूति के साथ-साथ अध्ययनशीलता का भी परिचय मिलता है। चरणदास (1703-1782ई.) चरणदास के पिता मुरलीधर राजस्थान के डेहरा गांव के रहने वााले ढ...

भाव बोध सहित :अधरं मधुरं वदनं मधुरं, नयनं मधुरं हसितं मधुरम्। हृदयं मधुरं गमनं मधुरं, मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥1।।

भाव बोध सहित : अधरं मधुरं वदनं मधुरं, नयनं मधुरं हसितं मधुरम्। हृदयं मधुरं गमनं मधुरं, मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥1।। (मधुराधिपते अखिलं मधुरम्) अर्थ (Meaning in Hindi): अधरं मधुरं – श्री कृष्ण के होंठ मधुर हैं वदनं मधुरं – मुख मधुर है नयनं मधुरं – नेत्र (ऑंखें) मधुर हैं हसितं मधुरम् – मुस्कान मधुर है हृदयं मधुरं – हृदय मधुर है गमनं मधुरं – चाल भी मधुर है मधुराधिपते – मधुराधिपति (मधुरता के ईश्वर श्रीकृष्ण) अखिलं मधुरम् – सभी प्रकार से मधुर है वचनं मधुरं चरितं मधुरं, वसनं मधुरं वलितं मधुरम्। चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं, मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥2।। (मधुराधिपते अखिलं मधुरम्) अर्थ (Meaning in Hindi): वचनं मधुरं – भगवान श्रीकृष्ण के वचन (बोलना) मधुर है चरितं मधुरं – चरित्र मधुर है वसनं मधुरं – वस्त्र मधुर हैं वलितं मधुरम् – वलय, कंगन मधुर हैं चलितं मधुरं – चलना मधुर है भ्रमितं मधुरं – भ्रमण (घूमना) मधुर है मधुराधिपते – मधुरता के ईश्वर श्रीकृष्ण (मधुराधिपति) अखिलं मधुरम् – आप (आपका) सभी प्रकार से मधुर है वेणुर्मधुरो रेणुर्मधुरः, पाणिर्मधुरः पादौ मधुरौ। न...